E20 पेट्रोल पर उठे बड़े सवाल! सरकार, ऑटो कंपनियां और मैकेनिकों की राय में आखिर कितना फर्क?

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न्यूज़ डेस्क | Red7News24
नई दिल्ली | Published By: Anand Vishwakarma
Updated: रविवार, 12 जुलाई 2026 |


विस्तार

देशभर में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर केंद्र सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता, विदेशी मुद्रा की बचत और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर पुराने वाहनों के मालिक माइलेज घटने, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और फ्यूल सिस्टम में खराबी जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और विभिन्न वाहन कंपनियों के पुराने ओनर मैनुअल में दिए गए अलग-अलग दावों ने आम उपभोक्ताओं की उलझन और बढ़ा दी है।


E20 पेट्रोल क्या है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना और पर्यावरण को कम प्रदूषित करना है।


सरकार का दावा क्या है?

नीति आयोग की रिपोर्ट “भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण 2020-25” के अनुसार E20 ईंधन अपनाने से भारत को हर वर्ष लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोपहिया वाहनों से निकलने वाला कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन 30 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में लगभग 3 से 7 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।


ARAI ने भी जताई चिंता

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार जिन वाहनों को 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E10) के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कई तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल नमी को आकर्षित करता है, जिससे पुराने वाहनों में रबर पाइप, गैसकेट, सील, फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों के समय से पहले खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे इंजन में जंग लगने और फ्यूल सिस्टम प्रभावित होने की संभावना भी रहती है।


वाहन कंपनियों के दावों और पुराने मैनुअल में विरोधाभास

मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी कई कंपनियों के पुराने ओनर मैनुअल में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि E10 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इंजन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में वाहन की वारंटी पर भी असर पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर यही कंपनियां अब सार्वजनिक रूप से E20 पेट्रोल को सुरक्षित बता रही हैं। इसी विरोधाभास को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से जवाब भी मांगा है।


मैकेनिकों ने बताई जमीनी हकीकत

राशिद अली (गैराज संचालक) का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने पहले कभी फ्यूल पंप से जुड़ी इतनी शिकायतें नहीं देखीं, जितनी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल आने के बाद सामने आ रही हैं। कई मामलों में फ्यूल पंप की मोटर जाम होने की शिकायत मिल रही है।

महेश (टू-व्हीलर मिस्त्री) के अनुसार पुराने स्कूटरों में फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर चोक होने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।

पारिख अहमद (कार मैकेनिक) का कहना है कि एथेनॉल युक्त पेट्रोल का असर रबर पाइप और गैस किट पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

सुनील कुमार (मैकेनिक) के मुताबिक 2023 से पहले बनी कई बाइकों में इंजन हेड और वाल्व में जंग लगने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।


वाहन मालिकों की बढ़ी परेशानी

मोटरसाइकिल मालिक राजा का कहना है कि उनकी बाइक पहले करीब 50 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, जो अब घटकर लगभग 45 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है। इससे हर महीने पेट्रोल पर लगभग 500 रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहा है।

पुरानी एक्टिवा की मालिक छवि का कहना है कि सर्दियों में अब वाहन स्टार्ट करने में पहले से अधिक परेशानी होती है।

13 साल पुरानी कार के मालिक गौरव जैन का कहना है कि वह अपनी कार को सुरक्षित रखना चाहते हैं, लेकिन पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध नहीं है।

कार मालिक अमन का कहना है कि जब ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में उपभोक्ताओं को अलग-अलग प्रकार के ईंधन का विकल्प मिलता है, तो भारत में भी लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रिसर्चर प्रोफेसर डॉ. शुभम शर्मा के अनुसार E20 एथेनॉल नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से जो इंजन E20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, उनमें नमी के कारण जंग लगना, रबर और सीलिंग पार्ट्स का खराब होना, इंजेक्टर एवं फ्यूल पंप पर असर पड़ना तथा कम ऊर्जा घनत्व के कारण माइलेज में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

उन्होंने बताया कि सर्दियों में E20 ईंधन के कारण वाहन स्टार्ट होने और क्रैंकिंग में भी अधिक समय लग सकता है। उनका मानना है कि बेहतर इंजन डिजाइन, एथेनॉल-फ्रेंडली सामग्री और आधुनिक फ्यूल सिस्टम इन समस्याओं का समाधान हैं।


बीएस4 और बीएस6 वाहनों में क्या है अंतर?

विशेषज्ञों के अनुसार बीएस4 और उससे पहले के कई वाहन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उनके फ्यूल सिस्टम, रबर पाइप, सील, गैसकेट और अन्य कंपोनेंट्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं 2023 के बाद आने वाले अधिकांश बीएस6 वाहनों में एथेनॉल-फ्रेंडली रबर, एल्युमिनियम और अन्य आधुनिक सामग्री का उपयोग किया गया है। यही वजह है कि ऐसे वाहन E20 पेट्रोल के साथ बेहतर प्रदर्शन करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।


निष्कर्ष

E20 पेट्रोल को लेकर देश में बहस अभी जारी है। सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, जबकि पुराने वाहन मालिक और कई मैकेनिक इसके कारण होने वाली तकनीकी समस्याओं और माइलेज में कमी की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन वाहनों को E20 के अनुरूप डिजाइन किया गया है, उनके लिए यह ईंधन सुरक्षित है, लेकिन पुराने वाहनों के लिए सावधानी और तकनीकी सलाह के साथ ही इसका उपयोग करना बेहतर होगा।

E20 पेट्रोल पर बवाल! सच क्या है, जानिए पूरी पड़ताल
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Author: Red 7 News 24

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