गाजियाबाद RTO में कथित अवैध वसूली का खेल! सूत्रों के अनुसार लॉगिन आधारित कार्यों के लिए तय हैं अलग-अलग रेट

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प्रमोद कौशिक | विशेष संवाददाता, गाजियाबाद

सार

गाजियाबाद के संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आरटीओ कार्यालय में विभिन्न लॉगिन आधारित सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए सरकारी शुल्क के अतिरिक्त कथित रूप से अवैध धनराशि वसूले जाने का सिलसिला जारी है। दावा किया जा रहा है कि कार्यालय में कुछ कार्य बिना एजेंटों या कथित दलालों के माध्यम से कराना आम लोगों के लिए कठिन होता जा रहा है।

RTO की व्यवस्था पर सवाल, जांच की उठी मांग।”

सूत्रों का कहना है कि कार्यालय में लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, चेसिस पासिंग तथा अन्य तकनीकी कार्यों में फाइलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि कई मामलों में निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के बावजूद आवेदकों को एजेंटों के माध्यम से ही काम कराने की सलाह दी जाती है।

सूत्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सीधे कार्यालय पहुंचकर अपना कार्य कराने का प्रयास करता है तो उसकी फाइल में तकनीकी कमियां बताकर प्रक्रिया लंबी कर दी जाती है। ऐसे में अधिकांश लोग मजबूरी में एजेंटों के माध्यम से अपना कार्य पूरा कराते हैं। हालांकि इन आरोपों की विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कथित ‘रेट लिस्ट’ भी चर्चा में

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में आरटीओ कार्यालय से जुड़ी एक कथित अनौपचारिक “रेट लिस्ट” भी एजेंटों और वाहन स्वामियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि इस सूची में विभिन्न कार्यों के लिए सरकारी शुल्क के अतिरिक्त कथित रूप से ली जाने वाली रकम का उल्लेख किया गया है। Red7 News 24 इस सूची की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।

सूत्रों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार कथित अतिरिक्त वसूली की सूची इस प्रकार बताई जा रही है—

अतिरिक्त शुल्क सूची (Additional Charges)

कार्य का विवरण अतिरिक्त राशि (₹)
डीएल री-टेस्ट (DL Re-Test) ₹2,200
डीएल रिन्यूअल (DL Renewal) ₹500
टैक्सी चेसिस पासिंग ₹1,000
कार चेसिस ₹500
मोटरसाइकिल चेसिस ₹300
नया रजिस्ट्रेशन चेसिस ₹200
मोटरसाइकिल न्यू चेसिस ₹150
अधिकारियों के लॉगिन से अप्रूवल ₹200

सूत्रों का दावा है कि यह कथित रेट अलग-अलग कार्यों के लिए एजेंटों के माध्यम से बताए जाते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस सूची को किसने तैयार किया और इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं।

लॉगिन अप्रूवल के नाम पर भी वसूली के आरोप

सूत्रों का कहना है कि आरटीओ कार्यालय में कुछ कार्य ऐसे हैं जिनके लिए अधिकारियों के लॉगिन से डिजिटल स्वीकृति आवश्यक होती है। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर कथित तौर पर अतिरिक्त धनराशि मांगी जाती है। कुछ लोगों का दावा है कि केवल लॉगिन अप्रूवल के नाम पर भी अलग से रकम ली जाती है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

वाहन मालिकों और एजेंटों में नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, लगातार बढ़ती कथित वसूली को लेकर वाहन मालिकों और कई अधिकृत एजेंटों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो इससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।

जांच की मांग

यदि सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

फिलहाल इस संबंध में परिवहन विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Red 7 News 24
Author: Red 7 News 24

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