गाजियाबाद। नूर नगर सिहानी स्थित पंडित तेजराम B.Ed कॉलेज की कार्यप्रणाली और वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। कॉलेज की इमारत पर लगा नाम पहली नजर में इसे एक सामान्य शिक्षण संस्थान के रूप में दर्शाता है, लेकिन कॉलेज में पढ़ाई, विद्यार्थियों की उपस्थिति, आधारभूत सुविधाओं और निर्धारित मानकों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने के बजाय केवल परीक्षा और डिग्री की प्रक्रिया तक सीमित रखा जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षा विभाग से होना अभी बाकी है।

B.Ed जैसे व्यावसायिक शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संचालन के लिए संस्थान को निर्धारित शैक्षणिक और आधारभूत मानकों का पालन करना होता है। संस्थान में पर्याप्त और निर्धारित मानकों के अनुरूप क्लासरूम, लाइब्रेरी, शिक्षण संसाधन, प्रयोगशाला, खेल संबंधी सुविधाएं, कार्यालय व्यवस्था और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सवाल यह है कि पंडित तेजराम B.Ed कॉलेज में निर्धारित मानकों के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल कॉलेज की मान्यता और निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी है। यदि कॉलेज निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है तो संबंधित निरीक्षण रिपोर्ट और मान्यता से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं? कॉलेज में कितने विद्यार्थी पंजीकृत हैं, कितने नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित होते हैं और उनके लिए कितने शिक्षक नियुक्त हैं? क्या कॉलेज में निर्धारित समय के अनुसार कक्षाएं संचालित होती हैं? क्या लाइब्रेरी और लैब वास्तव में विद्यार्थियों के उपयोग में हैं? इन सवालों के जवाब कॉलेज प्रशासन और संबंधित विभाग से मांगे जाना जरूरी है।
मामला केवल एक कॉलेज की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। यदि किसी शिक्षण संस्थान में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है और इसके बावजूद वह संचालित हो रहा है, तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ उन विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े होते हैं, जो फीस देकर शिक्षक बनने की तैयारी करते हैं। वहीं यदि कॉलेज सभी नियमों का पालन कर रहा है तो उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई भी सामने आनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और अनियमितताओं पर कार्रवाई करने की बात करती रही है। ऐसे में गाजियाबाद जैसे जिले में किसी B.Ed कॉलेज को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग को कॉलेज की मान्यता, निरीक्षण रिपोर्ट, शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यार्थियों की उपस्थिति, आधारभूत सुविधाओं और पाठ्यक्रम संचालन की स्थिति की जांच करनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
RED7 NEWS 24 की टीम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज की जमीनी स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की है। हमारी पड़ताल में कॉलेज की मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड, निरीक्षण प्रक्रिया, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, क्लासरूम, लाइब्रेरी, लैब और अन्य आवश्यक सुविधाओं को प्रमुखता से जांचा जाएगा।
इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। यदि कॉलेज प्रबंधन निर्धारित सभी मानकों को पूरा करता है, तो उसे अपने दस्तावेज और व्यवस्थाएं सार्वजनिक कर लगाए जा रहे सवालों का जवाब देने का पूरा अधिकार है। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होगी कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नूर नगर सिहानी स्थित पंडित तेजराम B.Ed कॉलेज वास्तव में निर्धारित शैक्षणिक मानकों पर कितना खरा उतरता है? कॉलेज की मान्यता और निरीक्षण के दौरान क्या-क्या जांच की गई थी? विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा और सभी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। RED7 NEWS 24 इस मामले की पड़ताल जारी रखेगा और सामने आने वाले प्रमाणित तथ्यों को अपने पाठकों के सामने रखेगा।









